रक्त (BLOOD

 रक्त (BLOOD)

रक्त क्या है?

मानव रक्त एक तरल संयोजी ऊतक होता हैंउसमेंउपस्थित हीमोग्लोस्िन केकारण इसका रंग लाल होता हैं। यह

एक स्िपस्िपा क्षारीय पदािथहैस्जसका PH मान 7.4 होता हैं।

रक्त का स्नमाथण अस्थि मज्जा मेंहोता हैंस्कंतुगवाथवथिा के समय स्ििुकेिरीर मेंरक्त का स्नमाथण यकृत मेंहोता

हैं।

प्लीहा 400ml रक्त को थटोर कर केरखता हैं। यह रक्त मेंउपस्थित कमजोर एवंपरुानी रक्त कस्णकाओंको

(RBCs और WBC) को मार देता हैंइसी कारण सेप्लीहा को RBCs की कब्र कहााँजाता हैं।

सामान्य थवथि व्यस्क्त केिरीर मेंऔसतन रक्त की मात्रा 5-6 लीटर तक होती हैं। मस्हलाओंमेंपरुुषों की तुलना

में1/2 लीटर रक्त कम होता हैं। जो स्क उस व्यस्क्त केकुल वजन का 7-9% हो सकती हैं।

मानव रक्त के समूह (Blood Groupरक्त समहू की खोज कालथलैंडथटीनर केद्वारा 1900 ई. मेंकी गई िी। इस खोज केस्लए इन्हें1930 मेंनोिल

परुथकार भी स्दया गया िा इनकेअनसुार प्रत्येक जाती के जीव केरक्त मेंएक स्विेष प्रकार की प्रोटीन एन्टीजन

उपस्थित होती हैंइसकेअलावा एक स्वपरीत प्रोटीन एटं ीिॉडी भी उपस्थित होती हैंयह दोनों प्रोटीन एक दसूरेके

स्वपरीत होतेहैं।

रक्त समहू O सवथदाता माना जाता हैंक्योंस्क इसमेंएन्टीजन अनपुस्थित होता हैंजिस्क रक्त समहू AB सवथग्राही

माना जाता हैं। क्योंस्क इस रक्त समहू मेंएटं ीिॉडी अनपुस्थित होता हैं।

मनष्ुयों केरक्तो की स्भन्नता का मख्ुय कारण लाल रक्त कण (RBCs) मेंपायी जानेवाली ग्लाइकोप्रोटीन हैं,

स्जसेएन्टीजन (Antigen) कहतेहैं।

एन्टीजन दो प्रकार के होतेहैं

1. एन्टीजन A

2. एन्टीजन B

एन्टीजन (AB) और एटं ीिाडी (ab) एन्टीजन और एटं ीिॉडी समान रूप सेएक साि नहीं रह सकतेहैंएन्टीजन

या ग्लाइकोप्रोटीन की उपस्थिस्त केआधार पर मनष्ुय मेंिार प्रकार केरुस्धर वगथहोतेहैं।

 स्जनमेंएन्टीजन A होता हैं– रुस्धर वगथA

 स्जनमेंएन्टीजन B होता हैं– रुस्धर वगथB

 स्जनमेंएन्टीजन A एवंB दोनों होतेहैं– रुस्धर वगथAB

 स्जनमेंदोनों मेंसेकोई एन्टीजन नहीं होता हैं– रुस्धर वगथO

A ब्लड ग्रपु

स्जन व्यस्क्तयों की रक्त कोस्िकाओंपर A प्रकार केएटं ीजेन्स के साि प्लाज़्मा मेंएटं ीजन – B एटं ीिॉडी हो

उनका ब्लड ग्रपु A होता है।B ब्लड ग्रपु

स्जन व्यस्क्तयों की रक्त कोस्िकाओंपर B प्रकार केएटं ीजेन्स के साि प्लाज़्मा मेंएटं ी- A एटं ीिॉडीज़ हो उनका

ब्लड ग्रपु B होता है।

AB ब्लड ग्रपु

स्जस व्यस्क्त की रक्त कोस्िकाओंपर A और B दोनों ही एटं ीजन्ेस होतेहैंऔर कोई भी एटं ीिॉडी नहीं होता

उनका ब्लड ग्रपु AB होता है।

O ब्लड ग्रपु

स्जन व्यस्क्तयों की रक्त कोस्िकाओंपर कोई भी एटं ीजने मौजदू नहीं होता लेस्कन प्लाज़्मा मेंएटं ी- A और B

दोनों ही एटं ीिॉडीज़ होतेहैंउनका ब्लड ग्रपु O होता है।

रक्त केकायय

वैसेतो जानतेहैस्क िरीर के सभी अगं िहुत महत्वपणूथहैलेस्कन रक्त केस्िना तो जीवन असंभव है

नीिेहम मानव िरीर मेंरक्त केकुछ महत्वपणूथकायो को पढेंगे

 मानव िरीर मेंरक्त की मात्रा िरीर के भार का लगभग 7% होती हैं।

 िरीर के ताप को स्नयंत्रण तिा िरीर को रोगों सेरक्षा करना।

 रक्त का िक्का िनाना।

 आक्सीजन को िरीर केस्वस्भन्न अगं ों तक पहुिाँ ाना एवं कािथनडाई आक्साइड को अगं ों सेफे फडा तक

पहुिं ाना।

 िरीर के तापक्रम को सामान िनाएं रखना तिा िरीर को रोगों सेरक्षा करना।

 आवश्यक भोज्य पदािों को िरीर केस्वस्भन्न भागों तक पहुिाँ ना।

 लैंस्गक वरण मेंसहायता करना तिा स्वस्भन्न अंगों मेंसहयोग थिास्पत करना।मानव रक्त पररसंचरण

रक्त पररसंिरण की खोज सन 1628 ई. मेंस्वस्लयम हावेकेद्वारा की गई िी इसकेअनुसार मानव िरीर मेंरक्त

को पररसंिरण पम्प करनेकेस्लए एक 4 कोष्ठकीय हृदय होता हैं। स्जसमेंदो स्हथसेको आस्लंद और िेष स्निले

दो भागों को स्नलय कहााँजाता हैं।

इसकेअंतगतथ स्नम्न तीन भाग होतेहैं

1. हृदय :यह हृदयावरण (Pericardium) नामक िैली मेंसरुस्क्षत रहता हैंहृदय का कुल वजन 375

ग्राम होता हैंयह िरीर का सिसेव्यक्त अगं हैंयह 1 स्मनट में72 िार धडकता हैंयह िच्िों में102

िार धडकता हैंजो स्क 1 स्मस्नट मेंलगभग 500 लीटर रक्त (व्यक्त) को िरीर केस्वस्भन्न भागों तक

पहुिं ाता हैं।

2. शिराएँ: यह िरीर की ऊपरी भागों मेंपाई जाती हैंजो स्क रक्त को िरीर केस्वस्भन्न अंको सेहृदय तक

पहुिाँ ती हैंइनमेंअिद्धु रक्त प्रभास्वत होता हैं। स्जस रक्त मेंकािथनडाइआक्साइड की मात्रा एवं ऑक्सीजन

की मात्रा कम होती हैंवह अिद्धु रक्त कहलाता हैं। एकमात्र पल्मोनरी स्िरा जो स्क फे फडों सेरक्त को

िाएं आस्लंद तक पहुिाँ ाती हैं। इसमेंिद्धु रक्त प्रवास्हत होता हैं।

3. धमशनयाँ: यह िरीर की गहराई वालेभागों मेंउपस्थित होती हैंइनमेंिद्वु रक्त प्रवास्हत होता हैंवह रक्त

स्जनमेंआक्सीजन की मात्रा अस्धक एवं कािथनडाइआक्साइड की मात्रा कम होती हैं।

धमस्नयााँरक्त को हृदय सेिरीर केस्वस्भन्न अकं ों तक पहुिाँ ाती हैंइनमेंकपाट पाए जातेहैं। इनमेंप्रभास्वत रक्त तेज

गस्त सेप्रभास्वत होता हैं। िरीर मेंएक मात्र पल्मोनरी धमनी स्जसमेंअिद्धु रक्त प्रभास्वत होता हैं। यह धमनी रक्त

को दाया स्नलय सेफे फडों तक पहुिाँ ाती हैं।

रक्त का थक्का कै सेबनता है?

रुस्धर प्लाज्मा के प्रोथ्रोिस्मन तिा फाईस्ब्रनोजेन का स्नमाथण यकृत मेंस्वटास्मन k की सहायता सेहोता हैं।

स्वटास्मन k रक्त के िक्का िनानेमेंसहायता होता हैं। समान्यतः रक्त का िक्का 2 से5 स्मनट मेंिन जाता हैं।

रक्त के िक्का िनानेकेस्लए अस्नवायथप्रोटीन फाईस्ब्रनोजेन हैं।

रक्त मेंउपशथथत तत्वरक्त मेंउपस्थित सजीव एवं स्नजीव पदािों केआधार पर 2 वगों मेंस्वभास्जत स्कया गया हैं।

1. प्लाज्मा

यह सम्पणूथरक्त का लगभग 55% भाग होता हैं। प्लाज्मा रक्त का अजीस्वत तरल भाग होता हैं। जोस्क

स्नजीव अवथिा मेंपाया जाता हैंरक्त का लगभग 60% भाग प्लाज्मा होता हैं। इसका 90% भाग जल, 7%

प्रोटीन, 0.9% लवण और 0.1% ग्लकूोज होता हैं। िेष पदािथिहुत कम मात्रा मेंहोता हैं।

प्लाज्मा के कार्य

 पिेहुए भोजन एवंहामोन का िरीर मेंसंवहन प्लाज्मा केद्वारा ही होता हैं।

 जि प्लाज्मा मेंसेफईस्ब्रनोजेन नामक प्रोटीन को अलग कर देनेपर िेष भाग को सेरम कहााँजाता हैं।

 प्लाज्मा पोषक तत्व केपररवहन के साि-साि आक्सीजन और कािथनडाइआक्साइड केपररवहन मेंभी

मदद करता हैं।

 यह रोग प्रस्तरोधक क्षमता को िनाए रखनेमेंसहायक हैं।

2. कस्णकाएाँ/ रुस्धराणु

यह सम्पणूथरक्त प्लाज्मा केअस्तररक्त िेष 45% भाग होता हैंजो स्क सजीव अवथिा मेंहोता हैं

इसमें3 प्रकार केरक्त स्िम्िाणुउपस्थित होतेहैं।

1. लाल रक्त कस्णकाएाँ(RBCs (Red Blood Corpuscles)

2. थवेत रक्त कस्णकाएाँ(WBCs (White Blood Corpuscles or Leucocytes)

3. पस्टकाएं / रक्त स्िम्िाणु(Blood Platelets)

A. लाल रक्त कणिकाएँ

लाल रक्त कस्णकाओंका स्नमाथण लाल अस्थि मज्जा मेंहोता हैंयक्त मेंिननेवालेप्रोटीन ग्लोस्िन आक्सीजन

प्रस्क्रया केद्वारा रक्त मेंउपस्थित हीमो रंजक के साि स्क्रया कर हीमोग्लोस्िन का स्नमाथण करता हैंइसी केकारणरक्त लाल रंग का होता हैंइन कस्णकाओंकी जीवन अवधी 20 से120 स्दन तक होती हैं। RBCs को प्लीहा

केद्वारा एवं स्विेष स्थिस्त मेंयकृत केद्वारा समाप्त स्कया जाता हैं।

यह 7.2 म्यूव्यास की गोल पररस्ध की और दोनों ओर सेपैसेया रुपए के समान स्िपटी होती हैं। इनमेंकें द्रक नहीं

होता। वयथक परुुषों केरुस्धर के प्रस्त धन स्मलीमीटर मेंलगभग 50 लाख और स्ियों केरुस्धर के प्रस्त घन

स्मस्लमीटर में45 लाख लाल रुस्धर कोस्िकाएाँहोती हैं। इनकी कमी सेरक्तक्षीणता तिा रक्त श्वेताणमुयता रोग

होतेहैं। लाल रुस्धर कोस्िकाओं(erythrocytes) का जीवन 120 स्दन का होता है, तत्पश्चात्प्लीहा में

इनका अंत हो जात है।

लाल रक्त कणिकाओंके कार्य

 RBC का मख्ुय कायथिरीर की सभी कोस्िकाओंको आाँक्सीजन पहुिाँ ाना हैं।

 िरीर की हर कोस्िका मेंआक्सीजन पहुिाँ ाना एवं कािथनडाइआक्साइड को वापस लाना हैं।

 हीमोग्लोस्िन की मात्रा कम होनेपर एनीस्मया रोग हो जाता हैं।

 मानव िरीर मेंएक समान सवाथस्धक मात्रा मेंउपस्थित कोस्िकाओंRBC होती हैंइनकी कुल संख्या

परुुषों 5 स्मस्लयन और मस्हलाओंमें4.5 स्मस्लयन होता हैं।

 सोतेवक्त RBCs 5% कम हो जाता हैंएवं जो लोग 4,200 मीटर की ऊाँ िाई पर होतेहैंउनके

RBCs की संख्या स्हमोसाइटोमीटर (वायुमण्डीय दाि मेंकमी होनेपर) इनकेस्नमाथण में30% वस्ृद्ध

हो जाती हैं।

 थतनधारीयों केलाल रक्त कण उभयावतल होतेहैं। इसमेंके न्द्रक नहीं होता हैं। अपवाद – RBCs में

के न्द्रक उपस्थित होता हैंजिस्क दो थतनधारी (ऊाँ ट, लीमा) केरक्त मेंअनपुस्थित होता हैं।

नोट:- भ्रणू अवथिा मेंइसका स्नमाथण यकृत और प्लीहा मेंहोता हैं।

B. श्वेत रक्त कणिकाएं

थवेत रक्त कस्णकाओंका स्नमाथण अस्थि मज्जा मेंहोता हैंइनका जीवन काल 2 से4 स्दन का होता हैंइनकी मत्ृयु

रक्त मेंही हो जाती हैं। इनमेंके न्द्रक अनपुस्थित होता हैंइनका मख्ुय कायथहास्नकारक िैक्टीररया को नष्ट करना एवं

िरीर की प्रस्तरोधक क्षमता को िनाए रखता हश्वेत रक्त कणिकाओंके मख्ुर् कार्य

 रक्त मेंRBCs और WBCs का अनपुात 600 : 1 होता हैं।

 आकार और रिना मेंयह अमीिा के समान होता हैं।

 श्वेत रक्त कस्णकाओंमेंके न्द्रक होता हैं।

 इसका स्नमाथण स्लम्फ, नोड और कभी कभी यकृत एवं प्लीहा मेंभी होता हैं।

 इसका मख्ुय कायथिरीर को रोगों के संक्रमण सेििाना हैं।

 WBCs का सिसेअस्धक भाग (60% से70%) न्यट्रूोस्फल्स कस्णकाओंका िना होता

हैंन्यट्रूोस्फल्स कस्णकाओंका िना होता हैंन्यट्रूोस्फल्स कस्णकाएाँरोगाणओु ंतिा जीवाणओु ंका भक्षण

करती हैं।

 आगतं कु जीवाणओु ंका भक्षण करती हैं।

 येप्रस्तस्पंडों की रिना करती हैं।

 स्हपेररन उत्पन्न कर रुस्धरवास्हकाओंमेंयेरुस्धर को जमनेसेरोकती हैं।

 यह प्लाज्मा प्रोटीन और कुछ कोस्िका प्रोटीन की भी रिना करती हैं।

 स्हथटास्मनरोधी कायथकर िरीर को एलजी सेििानेमेंसहायक होती हैं।

C. पणिकाएं / रक्त णिम्िािु

यह के वल मनष्ुय एवं अन्य थतनधारीयों केरक्त मेंपाया जाता हैं। इसमेंकेके न्द्रक नहीं होता हैंइसका स्नमाथण

अस्थि मज्जा मेंहोता हैं। इसका जीवनकाल 3 से5 स्दन का होता हैंइसकी मत्ृयुप्लीहा मेंहोती हैं।

रक्त परिकाओंका स्नमाथण स्वटास्मन K की मदद सेयकृत मेंहोता हैंस्वटास्मन k पररवस्तथत होकर हाइड्रोनोस्जन

नामक प्रोटीन का स्नमाथण करता हैयही प्रोटीन रक्त के िक्का जमानेमेंसहायक हैं। यकृत केद्वारा ही एक स्वस्भन्न

प्रोटीन स्हपेररन का स्नमाथण स्कया जाता हैंजो स्क रक्त का िक्का जमानेका स्वरोध करती हैं।

 रक्त दाि को मापनेवालेयंत्र को स्थफग्मोमैनोमीटर कहााँजाता हैं।

 रक्त को RBCs की संख्या की गणना करनेवालेयंत्र को स्हमोसाइटोमीटर कहा जाता हैं।

 RBCs मेंउपस्थित आयरन को स्हमोस्टन कहा जाता हैं।

नोट: डेंगूज्वर केकारण मानव िरीर मेंप्लेटलेट्स की कमी हो जाती हैं।

रुशधर के चारों वर्गों के साथ एन्टीजन का शवतरणरुशधर वर्गय एन्टीजन एटं ीबॉडी

A के वल A के वल B

B के वल B के वल A

AB A, B दोनों कोई नहीं

O कोई नहीं A, B दोनों

स्कसी एन्टीजन की अनपुस्थिस्त मेंएक स्वपरीत प्रकार की प्रोटीन रुस्धर प्लाज्मा मेंपायी जाती हैं। इसको एटं ीिॉडी

कहतेहैंयह भी दो प्रकार की होती हैं।

 एटं ीिॉडी a

 एटं ीिॉडी b

रक्त का आधान (Blood Transfusion)

एन्टीजन A एवंएटं ीिॉडी a, एन्टीजन B एवंएटं ीिॉडी b एक साि नहीं रह सकतेहैं। ऐसा होनेपर यह आपस

मेंस्मलकर अत्यस्धक स्िपस्िपेहो जातेहैंस्जससेरक्त नष्ट हो जाता हैंइसेरक्त का अभीश्लेषण कहतेहैं। अतः रक्त

आधान मेंएन्टीजन तिा एटं ीिॉडी का ऐसा ताल-मेल करना िास्हए स्जससेरक्त का अभीश्लेषण न हो सके ।

O पॉशजशटव : इस ब्लड ग्रुपवालेउन सभी को रक्त देसकतेहैं, स्जनका ब्लड ग्रपु पॉस्ज़स्टव है। इसकेअलावा

O पॉस्ज़स्टव, O स्नगेस्टव सेरक्त लेसकतेहैं।O शनर्गेशटव : O नेगेस्टव ब्लड ग्रपुवालेलोगों को यस्ूनवसथल डोनर कहा जाता है, इस ग्रपु केलोग हर स्कसी को

रक्त देसकतेहैं।इसकेअलावा येके वल O नेगेस्टव ग्रपु सेही ब्लड लेसकतेहैं।

A पॉशजशटव : A पॉस्ज़स्टव AB पॉस्ज़स्टव ग्रपुवालों को रक्त देसकतेहैंऔर इनको O पॉस्ज़स्टव, A और

O स्नगेस्टव ब्लड िढाया जा सकता है।

A शनर्गेशटव : A और AB पॉस्ज़स्टव, A और AB स्नगेस्टव ग्रपुवालों को रक्त देसकतेहैं। A और O

स्नगेस्टव सेब्लड लेसकतेहैं।

B पॉशजशटव : B और AB पॉस्ज़स्टव ब्लड ग्रपु को रक्त देसकतेहैं। B पॉस्ज़स्टव, B और O स्नगेस्टव से

रक्त लेसकतेहैं।

B शनर्गेशटव : B और AB स्नगेस्टव, B और AB पॉस्ज़स्टव ग्रपु को ब्लड डोनेट कर सकतेहैंऔर B और

O स्नगेस्टव सेरक्त लेसकतेहैं।

AB पॉशजशटव : येग्रपुवालेAB पॉस्ज़स्टव को रक्त देसकतेहैं।

AB शनर्गेशटव : येग्रपुवालेAB पॉस्ज़स्टव और स्नगेस्टव दोनों को ही ब्लड देसकतेहैंऔर A, B, AB,

O स्नगेस्टव सेब्लड लेसकतेहैं।

RH कारक (RH Factor)

1940 ई. मेंलैण्डथटीनर और वीनर नेरुस्धर मेंएक अन्य प्रकार केएन्टीजन का पता लगाया। इन्होंनेरीसस िंदर

मेंइस तत्व का पता लगाया। इसस्लए इसेRh-factor कहतेहैं। स्जन व्यस्क्तयों केरक्त मेंयह तत्व पाया जाता

हैंउनका रक्त Rh सस्हत (Rh-positive) कहलाता हैंतिा स्जनमेंनहीं पाया जाता उनका रक्त Rh रस्हत

(Rh-negative) कहलाता हैं।

रक्त आधान के समय Rh-factor की भी जांि की जाती हैं। Rh-positive को Rh-positive

और Rh-negative को Rh-negative का रक्त स्दया जाता हैं।यस्द Rh-positive रक्त वगथका रक्त Rh-negative रक्त वगथवालेव्यस्क्त को स्दया जाता हैंतो प्रिम िार

कम मात्रा होनेकेकारण कोई प्रभाव नहीं पडता स्कन्तुजि दसूरी िार इसी प्रकार रक्तादान स्कया गया हो तो

अस्भषलेषण केकारण Rh-negative वालेव्यस्क्त की मत्ृयुहो जाती हैं।

हीमोग्लोशबन

लाल रुस्धर कोस्िकाओंमेंहीमोग्लोस्िन रहता है, स्जसकेकारण रुस्धर लाल स्दखाई देता है। हीमोग्लोस्िन

ग्लोिस्ूलन और हीम, या हीमेस्टन का िना होता है। ग्लोिूस्लन एक प्रकार का प्रोटीन है। हीमेस्टन केअदं र लोहा

रहता है। हीमोग्लोस्िन ही ऑक्सीजन का अविोषण करता हैऔर इसको रक्त द्वारा सारेिरीर मेंपहुिाँ ता है। रुस्धर

मेंहीमोग्लोस्िन की मात्रा 14.5 ग्राम प्रस्तित है। अनेक रोगों मेंइसकी मात्रा कम हो जाती है। इसमेंलोहा रहता

है। इसमेंिार स्परोल समहू रहतेहैं, जो क्लोरोस्फल सेसमानता रखतेहैं। इसका अपियन और उपियन सरलता से

हो जाता है। अल्प मात्रा मेंयह सि प्रास्णयों और पादपों मेंपाया जाता है। हीमोग्लोस्िन स्क्रथटलीय रूप सेसरलता

सेप्राप्त हो सकता है।

रुस्धर परीक्षा केस्लए वयथक व्यस्क्त की अंगलुी सेया स्िरा सेरुस्धर स्नकाला जाता है। रुस्धर को जमनेसेििाने

केस्लए थकंदन प्रस्तरोधी पदािथडालतेहैं। इसकेस्लए प्राय: अमोस्नयम और पोटैस्ियम ऑक्सेलेट प्रयक्तु स्कए

जातेहैं।

डिल ऑक्सेलेटेड रुस्धर को लेकर, अपकें स्द्रत मेंरखकर, आधेघटं ेतक घमुातेहैं। रुस्धर का कोस्िकायक्तु अंि

तल मेंिैठ जाता हैऔर तरल अंि ऊपर रहता है। यही तरल अंि प्लैज़्मा है।

एररथ्रोब्लाथटोशसस शिटेशलस

यस्द स्पता का रक्त Rh-positive हो तिा माता का रक्त Rh-negative हो तो जन्म लेंनेवाले

स्ििुकी जन्म सेपहलेगवाथवथिा मेंया जन्म के तरुंत िाद मत्ृयुहो जाती हैं। (ऐसा प्रिम संतान के िाद स्क संतान

होनेपर होता हैं)रक्त का पररपि

स्वस्भन्न अगं

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िायााँआस्लंद

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दैस्हक महाधमनी

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िायााँस्नलय

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स्वस्भन्न धमस्नयााँ

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छोटी धमस्नयााँ

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धमनी कोस्िकाएं

|

अगं

|

अग्र एवंपश्य महास्िरा

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दास्हना आस्लंद

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दास्हनेस्नलय

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पल्मोनरी धमनी

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फे फडा

|

पल्मोनरी स्िरा

|

बायााँ आल िंद

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